RTI Act, 2005

धारा 17 - राज्य मुख्य सूचना आयुक्त एवं राज्य सूचना आयुक्त को हटाना

Removal of State Chief Information Commissioner or State Information Commissioner

धारा 17 क्या कहती है?
RTI Act, 2005 की धारा 17 में राज्य मुख्य सूचना आयुक्त (State Chief Information Commissioner) तथा राज्य सूचना आयुक्त (State Information Commissioner) को उनके पद से हटाने (Removal) की प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है। सामान्यतः उन्हें केवल राज्यपाल (Governor) द्वारा हटाया जा सकता है और गंभीर मामलों में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही हटाया जाता है।
सरल भाषा में : राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त को बिना कारण या मनमाने तरीके से नहीं हटाया जा सकता। उन्हें हटाने के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है, जिससे राज्य सूचना आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनी रहती है।
धारा 17 का उद्देश्य

✔ आयोग की स्वतंत्रता बनाए रखना

राज्य सूचना आयोग को राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव से मुक्त रखना।

✔ निष्पक्ष कार्यप्रणाली सुनिश्चित करना

राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से कार्य कर सकें।

✔ कानूनी प्रक्रिया का पालन

हटाने की प्रक्रिया केवल कानून द्वारा निर्धारित आधारों पर ही हो।

✔ जवाबदेही एवं पारदर्शिता

राज्य सूचना आयोग की विश्वसनीयता एवं उत्तरदायित्व को बनाए रखना।

धारा 17(1) - राज्यपाल द्वारा हटाने की प्रक्रिया

राज्य मुख्य सूचना आयुक्त (State Chief Information Commissioner) अथवा राज्य सूचना आयुक्त (State Information Commissioner) को केवल राज्यपाल (Governor) द्वारा ही पद से हटाया जा सकता है।

किन आधारों पर?
  • सिद्ध कदाचार (Proved Misbehaviour)
  • अक्षमता (Incapacity)
राज्यपाल सीधे हटाने का आदेश जारी नहीं करते। पहले मामला सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) को जांच के लिए भेजा जाता है। यदि सर्वोच्च न्यायालय जांच के बाद रिपोर्ट देता है कि अधिकारी को हटाया जाना चाहिए, तभी राज्यपाल हटाने का आदेश जारी करते हैं।
धारा 17(2) - जांच के दौरान निलंबन

यदि मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, तो राज्यपाल जांच पूरी होने तक राज्य मुख्य सूचना आयुक्त अथवा राज्य सूचना आयुक्त को निलंबित (Suspend) कर सकते हैं।

आवश्यकता होने पर राज्यपाल जांच पूरी होने तक उन्हें कार्यालय में उपस्थित होने से भी रोक सकते हैं।
धारा 17(3) - बिना सर्वोच्च न्यायालय की जांच के हटाने की परिस्थितियाँ

निम्न परिस्थितियों में राज्यपाल सर्वोच्च न्यायालय की जांच के बिना भी राज्य मुख्य सूचना आयुक्त अथवा राज्य सूचना आयुक्त को पद से हटा सकते हैं—

  • दिवालिया (Insolvent) घोषित हो जाना।
  • नैतिक अधमता (Moral Turpitude) वाले अपराध में दोषसिद्ध होना।
  • अपने पद के अतिरिक्त किसी वेतनभोगी कार्य (Paid Employment) में संलग्न होना।
  • मानसिक या शारीरिक अक्षमता के कारण कार्य करने में अयोग्य होना।
  • ऐसा वित्तीय या अन्य हित (Financial Interest) प्राप्त कर लेना जिससे निष्पक्ष कार्य प्रभावित हो सकता हो।
धारा 17(4) - कदाचार (Misbehaviour) कब माना जाएगा?

यदि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त अथवा राज्य सूचना आयुक्त राज्य सरकार द्वारा किए गए किसी अनुबंध (Contract) या समझौते (Agreement) में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निजी लाभ प्राप्त करता है, तो इसे कदाचार (Misbehaviour) माना जाएगा।

उदाहरण : यदि कोई राज्य सूचना आयुक्त किसी सरकारी अनुबंध या ठेके से व्यक्तिगत आर्थिक लाभ प्राप्त करता है, तो यह धारा 17 के अंतर्गत कदाचार माना जाएगा।
हटाने की पूरी प्रक्रिया
चरण प्रक्रिया
1 राज्यपाल के समक्ष शिकायत या मामला प्रस्तुत होता है।
2 राज्यपाल मामला सर्वोच्च न्यायालय को जांच हेतु भेजते हैं।
3 सर्वोच्च न्यायालय जांच कर अपनी रिपोर्ट देता है।
4 रिपोर्ट के आधार पर राज्यपाल अंतिम निर्णय लेते हैं।
परीक्षा एवं RTI प्रशिक्षण हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
  • ✔ धारा 17 राज्य मुख्य सूचना आयुक्त एवं राज्य सूचना आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया से संबंधित है।
  • ✔ सिद्ध कदाचार (Proved Misbehaviour) अथवा अक्षमता (Incapacity) के आधार पर ही हटाया जा सकता है।
  • ✔ राज्यपाल सर्वोच्च न्यायालय को जांच के लिए संदर्भ भेजते हैं।
  • ✔ सर्वोच्च न्यायालय की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही राज्यपाल हटाने का आदेश जारी करते हैं।
  • ✔ जांच के दौरान राज्यपाल संबंधित आयुक्त को निलंबित कर सकते हैं।
  • ✔ कुछ विशेष परिस्थितियों में सर्वोच्च न्यायालय की जांच के बिना भी हटाया जा सकता है।
धारा 17 का सारांश
विषय प्रावधान
हटाने का अधिकार राज्यपाल
मुख्य आधार सिद्ध कदाचार (Misbehaviour) एवं अक्षमता (Incapacity)
जांच सर्वोच्च न्यायालय द्वारा
जांच के दौरान राज्यपाल निलंबित कर सकते हैं
विशेष परिस्थितियाँ दिवालियापन, नैतिक अधमता, वेतनभोगी कार्य, मानसिक/शारीरिक अक्षमता, हितों का टकराव
Frequently Asked Questions (FAQ)

प्रश्न 1 : राज्य मुख्य सूचना आयुक्त को कौन हटा सकता है?

उत्तर : केवल राज्यपाल।


प्रश्न 2 : क्या राज्यपाल सीधे पद से हटा सकते हैं?

उत्तर : सिद्ध कदाचार या अक्षमता के मामलों में पहले सर्वोच्च न्यायालय की जांच आवश्यक होती है। धारा 17(3) में वर्णित विशेष परिस्थितियों में राज्यपाल सीधे भी हटाने का आदेश दे सकते हैं।


प्रश्न 3 : जांच के दौरान क्या राज्य सूचना आयुक्त कार्य करता रहेगा?

उत्तर : नहीं। राज्यपाल आवश्यकता होने पर जांच पूरी होने तक उसे निलंबित कर सकते हैं तथा कार्यालय आने से भी रोक सकते हैं।


प्रश्न 4 : कदाचार (Misbehaviour) का एक उदाहरण क्या है?

उत्तर : यदि कोई राज्य सूचना आयुक्त राज्य सरकार के किसी अनुबंध या समझौते से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निजी आर्थिक लाभ प्राप्त करता है, तो इसे कदाचार माना जा सकता है।

निष्कर्ष

RTI Act, 2005 की धारा 17 का उद्देश्य राज्य मुख्य सूचना आयुक्त एवं राज्य सूचना आयुक्तों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखना है। इसलिए उन्हें हटाने की प्रक्रिया को कठोर एवं कानूनी रूप से सुरक्षित बनाया गया है। इससे राज्य सूचना आयोग बिना किसी अनुचित दबाव के निष्पक्ष रूप से कार्य कर सकता है तथा नागरिकों के सूचना के अधिकार की प्रभावी रक्षा सुनिश्चित होती है।