धारा 19 क्या कहती है?
RTI Act, 2005 की धारा 19 में
प्रथम अपील (First Appeal)
तथा
द्वितीय अपील (Second Appeal)
की पूरी व्यवस्था दी गई है।
यदि किसी आवेदक को
लोक सूचना अधिकारी (PIO) द्वारा
सूचना नहीं दी जाती,
समय पर उत्तर नहीं मिलता,
या दी गई सूचना से वह संतुष्ट नहीं है,
तो वह इस धारा के अंतर्गत अपील कर सकता है।
सरल भाषा में :
यदि आपका RTI आवेदन अस्वीकार कर दिया गया है,
अधूरी या गलत सूचना दी गई है,
या निर्धारित समय में उत्तर नहीं मिला है,
तो सबसे पहले
प्रथम अपील
और उसके बाद आवश्यकता होने पर
द्वितीय अपील
की जा सकती है।
धारा 19 का उद्देश्य
✔ सूचना प्राप्त करने का अधिकार सुरक्षित करना
यदि PIO द्वारा सूचना नहीं दी जाए,
तो नागरिक को कानूनी अपील का अधिकार देना।
✔ निष्पक्ष पुनर्विचार
वरिष्ठ अधिकारी एवं सूचना आयोग द्वारा
मामले की स्वतंत्र समीक्षा सुनिश्चित करना।
✔ पारदर्शिता एवं जवाबदेही
लोक प्राधिकरणों को उत्तरदायी एवं पारदर्शी बनाना।
✔ नागरिकों को न्याय दिलाना
सूचना न मिलने की स्थिति में
प्रभावी कानूनी उपाय उपलब्ध कराना।
धारा 19(1) - प्रथम अपील (First Appeal)
यदि किसी आवेदक को
लोक सूचना अधिकारी (PIO) द्वारा
निर्धारित समय में उत्तर नहीं मिलता
अथवा दिए गए उत्तर से वह संतुष्ट नहीं है,
तो वह
30 दिनों
के भीतर
प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (First Appellate Authority - FAA)
के समक्ष प्रथम अपील कर सकता है।
प्रथम अपील कब की जा सकती है?
- RTI आवेदन का उत्तर नहीं मिला हो।
- सूचना देने से मना कर दिया गया हो।
- अधूरी या गलत सूचना दी गई हो।
- अनुचित शुल्क मांगा गया हो।
- PIO के निर्णय से आवेदक असंतुष्ट हो।
धारा 19(2) - तीसरे पक्ष (Third Party) की अपील
यदि धारा 11 के अंतर्गत
किसी तीसरे पक्ष (Third Party)
से संबंधित सूचना देने का निर्णय लिया जाता है,
तो वह तीसरा पक्ष भी
उस निर्णय के विरुद्ध
30 दिनों
के भीतर प्रथम अपील कर सकता है।
इसका उद्देश्य तीसरे पक्ष के वैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है।
धारा 19(3) - द्वितीय अपील (Second Appeal)
यदि आवेदक
प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के निर्णय से संतुष्ट नहीं है
या निर्धारित समय में निर्णय प्राप्त नहीं होता,
तो वह
90 दिनों
के भीतर
केंद्रीय सूचना आयोग (CIC)
अथवा
राज्य सूचना आयोग (SIC)
में द्वितीय अपील कर सकता है।
महत्वपूर्ण :
यदि उचित कारण हो,
तो सूचना आयोग
90 दिनों के बाद भी
विलंब से दायर अपील स्वीकार कर सकता है।
धारा 19(4) - तीसरे पक्ष को सुनवाई का अवसर
यदि अपील किसी
तीसरे पक्ष की सूचना से संबंधित है,
तो सूचना आयोग
उस तीसरे पक्ष को भी
अपना पक्ष रखने का
उचित अवसर प्रदान करेगा।
किसी भी निर्णय से पहले
प्राकृतिक न्याय (Principles of Natural Justice)
का पालन किया जाता है।
धारा 19(5) - प्रमाण का भार (Burden of Proof)
अपील की सुनवाई के दौरान
यह सिद्ध करने का दायित्व
लोक सूचना अधिकारी (PIO)
पर होगा कि
सूचना न देना
कानून के अनुसार उचित था।
ध्यान दें :
आवेदक को यह साबित करने की आवश्यकता नहीं होती कि
सूचना क्यों दी जानी चाहिए।
बल्कि PIO को यह सिद्ध करना होता है कि
सूचना रोकना कानून के अनुरूप था।
सरल उदाहरण
आपने किसी सरकारी विभाग में RTI आवेदन दिया,
लेकिन 30 दिनों के भीतर कोई उत्तर नहीं मिला।
ऐसी स्थिति में आप पहले
प्रथम अपील
करेंगे।
यदि वहां से भी संतोषजनक निर्णय नहीं मिलता,
तो आप
90 दिनों के भीतर सूचना आयोग में द्वितीय अपील
कर सकते हैं।
धारा 19(6) - अपील का निस्तारण
प्रथम अपील अथवा तीसरे पक्ष की अपील का
निस्तारण यथासंभव
30 दिनों
के भीतर किया जाएगा।
यदि आवश्यक हो,
तो कारण लिखित रूप में दर्ज करते हुए
अधिकतम
45 दिनों
के भीतर निर्णय दिया जा सकता है।
धारा 19(7) - सूचना आयोग का निर्णय
केंद्रीय सूचना आयोग (CIC)
अथवा
राज्य सूचना आयोग (SIC)
द्वारा अपील में दिया गया निर्णय
बाध्यकारी (Binding)
होगा।
संबंधित लोक प्राधिकरण को
सूचना आयोग के आदेश का पालन करना अनिवार्य होगा।
धारा 19(8) - सूचना आयोग की शक्तियाँ
अपील का निर्णय करते समय
सूचना आयोग आवश्यक निर्देश जारी कर सकता है।
आयोग निम्न आदेश दे सकता है :
- सूचना उपलब्ध कराने का आदेश।
- लोक सूचना अधिकारी (PIO) की नियुक्ति का निर्देश।
- रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली में सुधार का आदेश।
- RTI Act के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश।
- कर्मचारियों को RTI संबंधी प्रशिक्षण देने का निर्देश।
- वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश।
- आवेदक को हुई हानि की क्षतिपूर्ति (Compensation) दिलाने का आदेश।
- आवश्यक होने पर आवेदन अस्वीकार करने का निर्णय।
धारा 19(9) - निर्णय की सूचना
सूचना आयोग अपने निर्णय की प्रति
अपीलकर्ता तथा संबंधित लोक प्राधिकरण
दोनों को उपलब्ध कराएगा।
निर्णय में उपलब्ध कानूनी उपायों (Legal Remedies)
की जानकारी भी दी जाती है।
परीक्षा एवं RTI प्रशिक्षण हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
-
✔ प्रथम अपील 30 दिनों के भीतर की जाती है।
-
✔ द्वितीय अपील 90 दिनों के भीतर सूचना आयोग में की जाती है।
-
✔ सूचना रोकने का औचित्य सिद्ध करने का भार PIO पर होता है।
-
✔ प्रथम अपील का निस्तारण सामान्यतः 30 दिनों तथा अधिकतम 45 दिनों में किया जाता है।
-
✔ सूचना आयोग का निर्णय बाध्यकारी (Binding) होता है।
-
✔ आयोग सूचना उपलब्ध कराने, क्षतिपूर्ति दिलाने एवं सुधारात्मक निर्देश जारी कर सकता है।
Frequently Asked Questions (FAQ)
प्रश्न 1 :
प्रथम अपील कितने दिनों में की जाती है?
उत्तर :
PIO के निर्णय अथवा निर्धारित समय समाप्त होने के 30 दिनों के भीतर।
प्रश्न 2 :
द्वितीय अपील कहाँ की जाती है?
उत्तर :
केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) अथवा राज्य सूचना आयोग (SIC) में।
प्रश्न 3 :
क्या सूचना आयोग क्षतिपूर्ति दिला सकता है?
उत्तर :
हाँ। धारा 19(8)(b) के अंतर्गत आयोग आवेदक को हुई हानि के लिए क्षतिपूर्ति का आदेश दे सकता है।
प्रश्न 4 :
क्या सूचना आयोग का निर्णय अंतिम एवं बाध्यकारी होता है?
उत्तर :
हाँ। धारा 19(7) के अनुसार सूचना आयोग का निर्णय संबंधित पक्षों पर बाध्यकारी होता है।
निष्कर्ष
RTI Act, 2005 की धारा 19 नागरिकों को
सूचना प्राप्त करने के लिए प्रभावी अपीलीय व्यवस्था प्रदान करती है।
प्रथम अपील, द्वितीय अपील तथा सूचना आयोग की शक्तियों के माध्यम से
यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्येक नागरिक को
कानून के अनुसार सूचना प्राप्त हो तथा
लोक प्राधिकरण पारदर्शिता एवं जवाबदेही का पालन करें।