धारा 13 क्या कहती है?
धारा 13 में
मुख्य सूचना आयुक्त (Chief Information Commissioner)
एवं
सूचना आयुक्तों (Information Commissioners)
के कार्यकाल, सेवा शर्तों, शपथ, त्यागपत्र तथा अन्य प्रशासनिक
प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।
सरल भाषा में :
यह धारा बताती है कि मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्त
कितने समय तक पद पर रहेंगे, वे किस प्रकार शपथ लेंगे,
किसे त्यागपत्र देंगे तथा उनकी सेवा से संबंधित अन्य नियम क्या होंगे।
धारा 13 का उद्देश्य
✔ निश्चित सेवा शर्तें
मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्तों की सेवा शर्तों को स्पष्ट करना।
✔ स्वतंत्र कार्यप्रणाली
आयोग की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र कार्यप्रणाली सुनिश्चित करना।
✔ प्रशासनिक स्पष्टता
नियुक्ति के बाद सेवा संबंधी नियमों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करना।
✔ पारदर्शिता एवं जवाबदेही
आयोग की कार्यप्रणाली को प्रभावी एवं उत्तरदायी बनाना।
धारा 13(1) - मुख्य सूचना आयुक्त का कार्यकाल
मुख्य सूचना आयुक्त (Chief Information Commissioner)
अपने पद पर
केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अवधि
तक कार्य करेंगे तथा
पुनर्नियुक्ति (Reappointment)
के पात्र नहीं होंगे।
महत्वपूर्ण :
कोई भी मुख्य सूचना आयुक्त
65 वर्ष की आयु
के बाद पद पर नहीं रह सकता।
धारा 13(2) - सूचना आयुक्त का कार्यकाल
प्रत्येक सूचना आयुक्त
केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अवधि
अथवा
65 वर्ष की आयु
तक, जो पहले हो,
पद पर रहेगा।
विशेष प्रावधान :
सूचना आयुक्त
मुख्य सूचना आयुक्त बनने के लिए पात्र हो सकता है,
लेकिन दोनों पदों का कुल कार्यकाल
कानून में निर्धारित सीमा से अधिक नहीं होगा।
धारा 13(3) - शपथ (Oath or Affirmation)
मुख्य सूचना आयुक्त तथा सूचना आयुक्त
पद ग्रहण करने से पूर्व
भारत के राष्ट्रपति
अथवा उनके द्वारा अधिकृत व्यक्ति के समक्ष
प्रथम अनुसूची (First Schedule)
के अनुसार शपथ या प्रतिज्ञान करेंगे।
शपथ का उद्देश्य
निष्पक्षता, ईमानदारी तथा संविधान के प्रति निष्ठा
सुनिश्चित करना है।
धारा 13(4) - त्यागपत्र (Resignation)
मुख्य सूचना आयुक्त अथवा सूचना आयुक्त
किसी भी समय
भारत के राष्ट्रपति
को संबोधित लिखित पत्र देकर
अपने पद से त्यागपत्र दे सकता है।
यदि आवश्यक हो,
तो हटाने (Removal) की प्रक्रिया
RTI Act की
धारा 14
के अनुसार अपनाई जाएगी।
धारा 13(5) - वेतन एवं सेवा शर्तें
मुख्य सूचना आयुक्त तथा सूचना आयुक्तों के
वेतन, भत्ते तथा अन्य सेवा शर्तें
केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नियमों
के अनुसार निर्धारित की जाती हैं।
महत्वपूर्ण :
नियुक्ति के बाद
उनकी सेवा शर्तों में
उनके प्रतिकूल परिवर्तन
नहीं किया जा सकता।
सरल उदाहरण
यदि किसी सूचना आयुक्त की नियुक्ति हो जाती है,
तो वह पहले राष्ट्रपति के समक्ष शपथ लेगा।
इसके बाद ही वह अपने पद का कार्यभार ग्रहण करेगा।
यदि भविष्य में वह पद छोड़ना चाहे,
तो राष्ट्रपति को लिखित त्यागपत्र देकर पद छोड़ सकता है।
परीक्षा एवं RTI प्रशिक्षण हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
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✔ धारा 13 मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्तों के कार्यकाल और सेवा शर्तों से संबंधित है।
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✔ मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्त राष्ट्रपति के समक्ष शपथ ग्रहण करते हैं।
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✔ कोई भी आयुक्त 65 वर्ष की आयु के बाद पद पर नहीं रह सकता।
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✔ त्यागपत्र भारत के राष्ट्रपति को संबोधित किया जाता है।
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✔ सेवा शर्तों में नियुक्ति के बाद प्रतिकूल परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
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✔ 2019 संशोधन के बाद कार्यकाल एवं सेवा शर्तें केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार निर्धारित होती हैं।
धारा 13 का सारांश
| विषय |
प्रावधान |
| कार्यकाल |
केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अवधि (65 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा के अधीन) |
| पुनर्नियुक्ति |
मुख्य सूचना आयुक्त के लिए पुनर्नियुक्ति नहीं |
| शपथ |
राष्ट्रपति अथवा उनके द्वारा अधिकृत व्यक्ति के समक्ष |
| त्यागपत्र |
राष्ट्रपति को लिखित पत्र देकर |
| सेवा शर्तें |
केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार |
Frequently Asked Questions (FAQ)
प्रश्न 1 :
मुख्य सूचना आयुक्त की शपथ कौन दिलाता है?
उत्तर :
भारत के राष्ट्रपति अथवा उनके द्वारा अधिकृत व्यक्ति।
प्रश्न 2 :
क्या सूचना आयुक्त पुनः नियुक्त हो सकता है?
उत्तर :
सूचना आयुक्त मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्त हो सकता है, यदि वह कानून के प्रावधानों के अनुरूप हो। मुख्य सूचना आयुक्त पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं होते।
प्रश्न 3 :
यदि कोई आयुक्त इस्तीफा देना चाहे तो क्या करेगा?
उत्तर :
वह भारत के राष्ट्रपति को संबोधित लिखित त्यागपत्र देगा।
प्रश्न 4 :
वर्तमान कानून के अनुसार कार्यकाल कैसे निर्धारित होता है?
उत्तर :
2019 संशोधन के बाद कार्यकाल केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार निर्धारित होता है।
निष्कर्ष
RTI Act, 2005 की धारा 13 केंद्रीय सूचना आयोग के
मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्तों की सेवा व्यवस्था को
स्पष्ट करती है। इस धारा के माध्यम से उनके कार्यकाल,
शपथ, त्यागपत्र तथा सेवा शर्तों का कानूनी आधार निर्धारित किया गया है।
इसका उद्देश्य आयोग की निष्पक्षता, स्वतंत्रता और प्रभावी कार्यप्रणाली
को सुनिश्चित करना है।