RTI Act, 2005

धारा 14 - मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्त को हटाना

Removal of Chief Information Commissioner or Information Commissioner

धारा 14 क्या कहती है?
RTI Act की धारा 14 में मुख्य सूचना आयुक्त (Chief Information Commissioner) तथा सूचना आयुक्त (Information Commissioner) को उनके पद से हटाने (Removal) की प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है। सामान्यतः उन्हें केवल भारत के राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है और गंभीर मामलों में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही हटाया जाता है।
सरल भाषा में : मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्त को मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकता। उन्हें हटाने के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है, जिससे आयोग की स्वतंत्रता एवं निष्पक्षता बनी रहे।
धारा 14 का उद्देश्य

✔ आयोग की स्वतंत्रता बनाए रखना

मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्तों को अनुचित दबाव से सुरक्षित रखना।

✔ निष्पक्ष कार्यप्रणाली सुनिश्चित करना

आयोग स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से अपने कार्य कर सके।

✔ कानूनी प्रक्रिया का पालन

हटाने की प्रक्रिया केवल कानून द्वारा निर्धारित आधारों पर ही हो।

✔ पारदर्शिता एवं जवाबदेही

आयोग की गरिमा, विश्वसनीयता एवं उत्तरदायित्व को बनाए रखना।

धारा 14(1) - राष्ट्रपति द्वारा हटाने की प्रक्रिया

मुख्य सूचना आयुक्त (Chief Information Commissioner) अथवा सूचना आयुक्त (Information Commissioner) को केवल भारत के राष्ट्रपति द्वारा ही पद से हटाया जा सकता है।

किन आधारों पर?
  • सिद्ध कदाचार (Proved Misbehaviour)
  • अक्षमता (Incapacity)
राष्ट्रपति सीधे हटाने का आदेश नहीं देते। पहले मामला सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) को भेजा जाता है। यदि सर्वोच्च न्यायालय जांच के बाद रिपोर्ट देता है कि अधिकारी को हटाया जाना चाहिए, तभी राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी कर सकते हैं।
धारा 14(2) - जांच के दौरान निलंबन

यदि मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, तो राष्ट्रपति जांच पूरी होने तक मुख्य सूचना आयुक्त अथवा सूचना आयुक्त को निलंबित (Suspend) कर सकते हैं।

आवश्यकता होने पर राष्ट्रपति उन्हें जांच पूरी होने तक कार्यालय आने से भी रोक सकते हैं।
धारा 14(3) - बिना सर्वोच्च न्यायालय की जांच के हटाने की परिस्थितियाँ

निम्न परिस्थितियों में राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय की जांच के बिना भी मुख्य सूचना आयुक्त अथवा सूचना आयुक्त को पद से हटा सकते हैं—

  • दिवालिया (Insolvent) घोषित हो जाना।
  • नैतिक अधमता (Moral Turpitude) वाले अपराध में दोषसिद्ध होना।
  • अपने पद के अतिरिक्त किसी वेतनभोगी कार्य (Paid Employment) में संलग्न होना।
  • मानसिक या शारीरिक अक्षमता के कारण कार्य करने में अयोग्य होना।
  • ऐसा वित्तीय या अन्य हित (Financial Interest) प्राप्त कर लेना जिससे निष्पक्ष कार्य प्रभावित हो सकता हो।
धारा 14(4) - कदाचार (Misbehaviour) कब माना जाएगा?

यदि मुख्य सूचना आयुक्त अथवा सूचना आयुक्त भारत सरकार द्वारा किए गए किसी अनुबंध (Contract) या समझौते (Agreement) में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निजी लाभ प्राप्त करता है, तो इसे कदाचार (Misbehaviour) माना जाएगा।

उदाहरण : यदि कोई सूचना आयुक्त किसी सरकारी ठेके से व्यक्तिगत आर्थिक लाभ लेता है, तो यह धारा 14 के अंतर्गत कदाचार माना जाएगा।
हटाने की पूरी प्रक्रिया
चरण प्रक्रिया
1 राष्ट्रपति के समक्ष शिकायत या मामला प्रस्तुत होता है।
2 राष्ट्रपति मामला सर्वोच्च न्यायालय को जांच हेतु भेजते हैं।
3 सर्वोच्च न्यायालय जांच कर अपनी रिपोर्ट देता है।
4 रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रपति अंतिम निर्णय लेते हैं।
परीक्षा एवं RTI प्रशिक्षण हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
  • ✔ धारा 14 मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया से संबंधित है।
  • ✔ सिद्ध कदाचार (Proved Misbehaviour) अथवा अक्षमता (Incapacity) के आधार पर ही हटाया जा सकता है।
  • ✔ राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को जांच के लिए संदर्भ भेजा जाता है।
  • ✔ सर्वोच्च न्यायालय की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी कर सकते हैं।
  • ✔ कुछ विशेष परिस्थितियों में राष्ट्रपति बिना सर्वोच्च न्यायालय की जांच के भी हटा सकते हैं।
  • ✔ धारा 14 आयोग की स्वतंत्रता एवं निष्पक्षता की रक्षा करती है।
धारा 14 का सारांश
विषय प्रावधान
हटाने का अधिकार भारत के राष्ट्रपति
मुख्य आधार सिद्ध कदाचार अथवा अक्षमता
जांच सर्वोच्च न्यायालय द्वारा
जांच के दौरान राष्ट्रपति निलंबित कर सकते हैं
विशेष परिस्थितियाँ दिवालियापन, नैतिक अधमता, वेतनभोगी कार्य, मानसिक/शारीरिक अक्षमता, हितों का टकराव
Frequently Asked Questions (FAQ)

प्रश्न 1 : मुख्य सूचना आयुक्त को कौन हटा सकता है?

उत्तर : केवल भारत के राष्ट्रपति।


प्रश्न 2 : क्या राष्ट्रपति सीधे हटा सकते हैं?

उत्तर : सिद्ध कदाचार या अक्षमता के मामलों में पहले सर्वोच्च न्यायालय की जांच आवश्यक होती है। हालांकि धारा 14(3) में वर्णित कुछ विशेष परिस्थितियों में राष्ट्रपति सीधे भी हटाने का आदेश दे सकते हैं।


प्रश्न 3 : जांच के दौरान क्या अधिकारी कार्य करता रहेगा?

उत्तर : नहीं। राष्ट्रपति आवश्यकता होने पर जांच पूरी होने तक उसे निलंबित कर सकते हैं तथा कार्यालय आने से भी रोक सकते हैं।


प्रश्न 4 : कदाचार (Misbehaviour) का एक उदाहरण क्या है?

उत्तर : यदि कोई सूचना आयुक्त भारत सरकार के किसी अनुबंध से व्यक्तिगत आर्थिक लाभ प्राप्त करता है या उसमें निजी हित रखता है, तो इसे कदाचार माना जा सकता है।

निष्कर्ष

RTI Act, 2005 की धारा 14 का उद्देश्य मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्तों की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखते हुए उनकी जवाबदेही भी सुनिश्चित करना है। इसलिए उन्हें हटाने की प्रक्रिया कठोर और कानूनी रूप से संरक्षित बनाई गई है। इससे आयोग निष्पक्ष रूप से कार्य कर सकता है तथा नागरिकों के सूचना के अधिकार की प्रभावी रक्षा होती है।